आज के इस भौतिकवादी युग में हमने उसी को सब कुछ मन लिया है, जो की प्रत्यक्ष दिखाई देता है, ऐसे भौतिकता से भरे इस युग में युगदृष्टा वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पूज्य श्री राम शर्मा आचार्य जी ने जन्मभर गायत्री का प्रचार-प्रसारसमाज के हर एक माध्यम से करके वेदमाता, देवमाता गायत्री को विश्वमाता के पद पर आसीन कर दिया, और युगों-युगों तक लुप्तप्राय उस गायत्री शक्ति को सभी के लिया सरल बना दिया।
सद्द्बुद्धि को प्रदान करनेवाली वेदमाता गायत्री, एवं सत्मार्ग को प्रशस्त करनेवाली उस पावन गुरुसत्ता के चरणों में शत- शत नमन ।
इतिहास में कभी-कभी ऐसा होता है कि अवतारी सत्ता एक साथ बहुआयामी रूपों में प्रकट होती है एवं करोड़ों ही नहीं, पूरी वसुधा के उद्धार-चेतनात्मक धरातल पर सबके मनों का नये सिरे से निर्माण करने आती है । परम पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य को एक ऐसी ही सत्ता के रूप में देखा जा सकता है, जो युगों-युगों में गुरु एवं अवतारी सत्ता दोनों ही रूपों में हम सबके बीच प्रकट हुई। अस्सी वर्ष का जीवन जीकर एक विराट् ज्योति प्रज्ज्वलित कर उस सूक्ष्म ऋषि चेतना के साथ एकाकार हो गयी, जो आज युग परिवर्तन को सन्निकट लाने को प्रतिबद्ध है ।

परम वंदनीया माताजी शक्ति का रूप थीं, जो कभी महाकाली, कभी माँ जानकी, कभी माँ शारदा एवं कभी माँ भगवती के रूप में शिव की कल्याणकारी सत्ता का साथ देने आती रही हैं । उनने भी सूक्ष्म में विलीन हो स्वयं को अपने आराध्य के साथ एकाकार कर ज्योतिपुरुष का एक अंग स्व्यं को बना लिया । आज दोनों सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, किन्तु, नूतन सृष्टि कैसे ढाली गयी, कैसे मानव गढ़ने का साँचा बनाया गया है, इसे शान्तिकुंज, ब्रह्मवर्चस, गायत्री तपोभूमि, अखण्ड ज्योति संस्थान एवं युगतीर्थ आँवलखेड़ा जैसी स्थापनाओं तथा संकल्पित सृजन सेनानीगणों के वीरभद्रों की करोड़ों से अधिक की संख्या के रूप में देखा जा सकता है ।
हो रहे अब विश्वव्यापी, आपके सुविचार है,
बन रहे उज्वल भविष्यत् के वही आधार है,
सत्य सरे आपके, उद्घोषित होते देखकर,
कह रहा जग, आप इस युग के "दशम अवतार" है।
पूज्य गुरुदेव, वंदनीय माताजी, एवं मिशन की जानकारी हेतु आप मेरे "वेदमाता" इस ब्लॉग को भेट दे सकते है।
