काश जिंदगी की किताब के पन्ने हम पलट पाते

आजकल न जाने क्यों अक्सर ये ख्याल आता है कि काश! किताब के पन्नों की तरह बीती जिंदगी के कुछ पल भी मै पलट पाता, आक्सफोर्ड की कोई डिक्शनरी जिंदगी के उन पन्नों, उन रिश्तों को समझने के लिए भी मेरे साथहोती जिसकी अनुपल्बधता में कुछ पैराग्राफ बिना समझे ही मै आगे बढ़ गया और जिंदगी एक किताब सी बन गई....काश! ईश्वर ये मौका देता कि बीते वक्त के पन्नो को संभाल कर उन्हें फिर से पलटकर उन पर मनचाही जिल्द मै बंधवा पाता और जिंदगी कभी प्यार से बुलाकर कहती कि "जी लो अपने आप से भी प्यारे उन रिश्तों को जो बीच मंझधार में अधूरे रह गए"......!
इसी काश! काश! की इस कश्मकश में एक सवाल मेरे जेहन में हमेशा दौड़ता है कि क्यों........... हर साल बदलते कोर्स को समझकर तो हम एक्जाम में अच्छे नंबरों से पास तो हो जाते हैं, लेकिन बचपन से सुनते आ रहे गीता के श्लोकों को नही समझ पाते, यह भी नहीं समझ पाते की इश्वर ने हमें इस धरातल पर किस प्रयोजन हेतु भेजा है और कारणवश जिंदगी के इम्तिहा में फेल हो जाते हैं.....?मनुष्य इश्वर की सबसे अप्रतिम कलाकृति है, मनुष्य इश्वर रूपी रजा का राजकुमार होते हुवे भी वह दिन-हिन् बना रहता है, सिर्फ और सिर्फ जीवन जीने की कला से अवगत न होने की वजह से। हमें हरवक्त आत्मकल्याण की और अग्रसर रहना चाहिए, जब धीरे-धीरे आत्मकल्याण सधेगा तब हम आगे समाज कल्याण की और बढ़ सकेंगे और अपनी जीवन का सही उद्देश्य हासिल कर सकेंगे। यह सब करते हुवे हमें जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र जो की साधना, उपासना, और आराधना के नाम से जाने जाते है उनसे अवगत होना पड़ेगा।
प्. पूज्य गुरु
देव पंडित श्री राम शर्मा आचार्यजी द्वारा लिखित "जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र" और 'जीवन जीने की कला" इन पुस्तकों में जीवन साधना करते हुवे जीवन रूपी पहल को कैसे आगे बढ़ाये इसकी विस्तृत जानकारी आप पा सकते है, अतः इन पुस्तकों का स्वाध्याय अवश्य करे।
उनकी इन्ही किताबोमे सन्निहित है की हम अपनी आप की साधना करे, और इश्वर की उपासना क
रते हुवे समाज की आराधना क
रके और अपनी जीवन रूपी किताब को स्वर्णिम सुन्दर बनाये। जीवन की यह स्वर्णिम किताब कोई कम अनुभवी लेखक के द्वारा नहीं बल्कि एक अनुभवी और अष्टपैलू लेखक के द्वारा लिखी जाये क्योकि वह लेखक कोई दूसरा न होकर हम स्वयं है।
जीवन एक ऐ
सी किताब है जिसमे हम वर्तमान में रहते हुवे वर्तमान की चीजे उसमे लिख तो सकते है पर भूतकाल में उन पन्नो को पलटकर देख नहीं सकते, और नाही भविष्य में क्या होनेवाला है यह देखकर सुधार सकते है। तात्पर्य अगर हमें अपना भुत और भविष्य दोनों सही रखना है तो प्रथमतः हमें अपना वर्तमान अच्छा रखना होगा। और जीवन में कभी कठ्नायिया आये कभी रिश्तोमे कडवाहट आये तो इन सबसे परे रहने के लिए अपने गुरु रूपी ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को साथ में रखे, उनसे हमेशा जुड़े रहे।
अगर हम यह सब कर पाए तो ही इस जिंदगी की पहल को सुनियोजित कर इसे सफलता के शिखर पर पहुंचा सकने में
समर् हो जायेंगे, और हमें जीवन के किताब के पन्ने बार-बार पलट कर देखनेकी आवश्यकता भी नहीं होगी, क्युकी जीवन की किताब के पन्नो को हम कभी भी नहीं पलट पाते यह एक कड़वा सच है जो हर एक मनुष्य को मानना पड्ता है।
यह सब बाते कितने दिनों से मन में घुटी-घुटी सी रहती थी पर आज इस ब्लॉग पर यह उमड़ पड़ी मेरे इस छोटीसी पेशकश में......!
पहल.....! जिंदगी की